चका
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चका पु ^१ † संज्ञा पुं॰ [सं॰ चक्र]
१. पहिया । चक्का । चाक । उ॰—बदन बहल कुंडल चका भौंह जुवा हय नैन । फेरत चित मैदान मै बहलवान वइ मैन ।—रसनिधि (शब्द॰) ।
२. परवाह । प्रतीक्षा । उ॰—पहिलै धकै पाँच सौ पड़िया, मुगलां प्राण चका से मुड़िया ।—राज रू॰, पृ॰ २२७ ।
चका † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ चकवा] [स्त्री॰ चकी] चक्रवाक । चकवा । उ॰—नैकु निमेष न लायत नैन चकी चितवै तिय देव तिया सी । मतिराम (शब्द॰) ।