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चटाका

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चटाका संज्ञा पुं॰ [अनु॰]

१. लकड़ी या और किसी कड़ी वस्तु के जोर से टूटने का शब्द । क्रि॰ प्र॰—होना । यौ॰—चटाके का=बहुत तेज । उग्र । प्रचंड । जैसे,—चटाके की धूप । चटाके की प्यास । विशेष—इसका प्रयोग गरमी तथा उसके कारण लगी हुई प्यास आदि की अधिकता ही के लिये प्रायः करते हैं ।

२. थप्पड़ । तमाचा । मुहा॰—चटाका जड़ना या लगाना=थप्पड़ मारना ।