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चतुरसम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चतुरसम † संज्ञा पुं॰ [सं॰ चतुस्सम] दे॰ 'चतुस्सम' । उ॰—मंगलमय निज निज भवन लोगन रचे बनाय । बीथी सींची चतुरसम चौकें चारु पुराय ।—तुलसी (शब्द॰) ।