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चतुर्थभाज

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चतुर्थभाज वि॰ [सं॰] वह जो प्रजा के उत्पन्न किए हुए अन्न आदि में से कर स्वरूप एक चौथाई अंश ले ले । राजा । विशेष—मनु के मत से कोई विशेष आवश्यकता या आपत्ति आ पड़ने के समय, केवल प्रजा के हितकर कामों में ही लगाने के लिये, राजा को अपनी प्रजा से उसकी उपज का एक चौथाई तक अंश लेने का अधिकार है ।