चत्त
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चत्त पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ चित्त] दे॰ 'चित्त' । उ॰ = सुकी सरिस सुक उच्चरयो, धरयो नारी सिर चित्त । समन सजोगिय संभरै, मन मै मंड़ित हित्त ।—पृ॰, रा॰, १४ । २ ।
चत्त पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ चित्त] दे॰ 'चित्त' । उ॰ = सुकी सरिस सुक उच्चरयो, धरयो नारी सिर चित्त । समन सजोगिय संभरै, मन मै मंड़ित हित्त ।—पृ॰, रा॰, १४ । २ ।