चनकना
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चनकना क्रि॰ अ॰ [अनु॰] दे॰ 'चटकना' । उ॰—विरह आँच नहिं सहि सकी सखी भई बेताब । क्नक गई सीसी गयो छिरकत छनकि गुलाब ।—श्रृं॰ सत॰ (शब्द॰) ।
चनकना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ चमक से नामिक धातु]
१. प्रकाश या ज्योति से युक्त दिखाई देना । प्रकाशित होना । देदीप्यमान होना । प्रभामय होना । जगमगाना । जैसे, सूर्य का चमकना, आग का चमकना । संयो॰ क्रि॰—उठना ।—जाना ।
२. कांति या आभा से युक्त होना । झलकना । भड़कीला होना । दमकना । जैसे,—सोने चाँदी का चंमकना । कपड़े का चम- कना ।
३. कीर्तिलाभ करना । प्रसिद्ध होना । समृद्धिलाभ करना । श्रीसंपन्न होना । उन्नति करना । जैसे,—देखो, वहाँ जाते ही वे कैसे चमक गए ।
४. वृद्धि प्राप्त करना । बढ़ती पर होना । बढ़ना । जैसे,—आजकल उनकी वकालत खूब चमकी है । मुहा॰—किसी की चमकना = किसी की श्रीवृद्धि होना । किसी की बढ़ती और कीर्ति होना ।
५. चौकना । भड़कना । चंचल होना (घोड़े आदि के लिये) । उ॰—चमक तमक हाँसी सिसक मसक झपट लपटानि । जेहि रति सो राते मुकत और मुकति अति हानि ।—बिहारी (शब्द॰) ।
६. फुरती से खसक जाना । झट से निकल जाना । उ॰—सखा साथ के चमकि गए सब गह्यो श्याम कर धाइ । औरन जानि जान मैं दीनो तुम कहँ जाहु पराइ ।—सूर (शब्द॰)
७. एकबारगी दर्द हो उठना । हिलने डोलने में किसी अंग की स्थिति में विपर्यय या गड़बड़ होने से उस अंग में सहसा तनाव लिए हुए पीड़ा उत्पन्न होना । जैसे,—बोझ उठाने में उसकी कमर चमक गई है ।
८. मटकना । उंगलियाँ आदि हिलाकर भाव बताना । (जैसा स्त्रियाँ प्रायः करती हैं) ।
९. मटककर कोप प्रकट करना ।
१०. लड़ाई ठनना । झगड़ा होना । उ॰—आजकल उन दोनों के बीच खूब चमक रही है ।
११. कमरे में चिक आना । अधिक बल पड़ने या चोट पहुँचने के कारण कमर मे दर्द उठना । झटका लगना । लचक आना । जैसे,—बोझ इतना भारी था कि उसे उठाने में कमर चमक गई । क्रि॰ प्र॰—जाना ।