चपकन
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चपकन संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ चपकना]
१. एक प्रकार का अंगा । अँगरखा ।
२. लोहे या पीतल काएक साज जिसे किवाड़, संदूक आदि में इसलिये लगाते हैं, जिसमें बंद संदूकया किवाड़, के पल्ले अटके रहें और झटके आदि से खुल न सकें । इसी के कोढे़ में ताला लगाया जाता है ।
३. एक छोटी कील जो हल की हरिष में आगे की ओर लगी होती है ।