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चपरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चपरना ^१पु क्रि॰ स॰ [अनु॰ चपचप]

१. किसी गीली या चिप- चिपी वस्तु को दूसरी वस्तु पर फैलाकर लगाना । वि॰ दे॰ 'चुपड़ना' । उ॰—ऊधो जाके माथे भागु । अबलन योग सिखावन आए चेरिहिं चपरि सोहागु । सूर (शब्द॰) ।

२. परस्पर मिलाना । सानना । ओतप्रोत करना । उ॰— विषय चिंता दोउ है माया । दोउ चपरि च्यौं तरुवर छाया । सूर (शब्द॰) । †

३. भाग जाना । खिसक जाना ।

चपरना ^२पुं॰ क्रि॰ सं॰ [सं॰ चपल] तेजी करना । जल्दी करना । उ॰—सरल बक्रगति पंचग्रह चपरि न चितवत कहु । तुलसी सूधे सूर ससि समय बिड़ंबत राहु ।—तुलसी (शब्द॰) ।