चमगादड़

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चमगादड़ संज्ञा पुं॰ [सं॰ चर्मचटका, पुं॰ चमचिचड़ी, हिं॰ चमगिदड़ी] एक उड़नेवाला बड़ा जंतु जिसके चारों पैर परदार होते हैं । विशेष—यह जमीन पर अपने पैरों से चल फिर नहीं सकता, या तो हवा में उड़ता रहता है या किसी पेड़ की डाल में चिपटा रहता है । दिन के प्रकाश में यह बाहर नहीं निकलता, किसी अँधेरे स्थान में पैर ऊपर और सिर नीचे करके औधा लटका रहता है । इनके झुंड के झुंड पुराने खंडहरों आदि में लटके हुए पाए जाते हैं । इस जंतु के कान बड़े बड़े होते हैं और उनमें आहट पाने की बड़ी शक्ति होती है । यद्यपि यह जंतु हवा में बहुत ऊपर तक उड़ता है, पर उसमें चिड़ियों के लक्षण नहीं हैं । इसकी बनावट चुहे की सी होती है, इसे कान होते हैं और यह अंडा नहीं देता, बच्चा देता है । अगले पर बहुत लबे होते हैं और उनके छोटों के पास से पतली हड्डियों की तीलियाँ निकली होती हैं, जिनके बीच में झिल्ली मढ़ी होती है । यही झिल्ली पर का काम देती है । तोलियों के सहारे से यह जंतु झिल्ली को छाते की तरह फैलाता और बंद करता है । यह प्रायः कीडे़ मकोड़े और फल खाता है । चमगादड़ अनेक प्रकार के होते हैं । कुछ तो छोटे छोटे होते हैं और कुछ इतने बड़े होते हैं कि परों को दोनों ओर फैलाकर नापने से वे गज डेढ़ गज ठहरते हैं ।