चम्पा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चंपा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ चम्पक]

१. मझोले कद का एक पेड । विशेष— इसमें हलके पीले रंग के फूल लगते हैं । इन फूलों में बडी तीव्र सुगंध होती है । चंपा दो प्रकार का होता है । एक साधारण चंपा, दूसरा कटहलिया । कटहलिया चंपा के फुल की महक पके कटहल से मिलती हुई होती है । ऐसा प्रसिद्ध है कि चंपा के फूल पर भौंरे नहीं बैठते । जंगलों में चंपे के जो पेड होते हैं, वे बहुत ऊँचे और बडे होते हैं । इसकी लकडी पीली, चमकीली और मुलायम, पर बहुत मजबूत होती है और नाव, टेबुल, कुरसी आदि बनाने और इमारत के काम में आती है । हिमालय की तराई, नैपाल, बंगाल, आसाम तथा दक्षिण भारत के जंगलों में यह अधिकता से पाया जाता है । चित्रकूट में इसकी लकडी की मालाएँ बनती हैं ।

२. चंपा का फूल । उ॰— अलि अवरंगजेब चंपा सिवराज है ।— भूषंण ग्रं॰, पृय १०१ ।

३. एक प्रकार का मीठा केला जो बंगाल में होता है ।

४. घोडे की एक जाति ।

५. एक प्रकार का कुसियार या रेशम का कीडा जिसके रेशम का व्यवहार पहले आसाम में बहुत होता था ।

६. एक प्रकार का बहुत बडा सदाबहार पेड । विशेष— यह वृक्ष दक्षिण भारत में अधिकता से पाया जाता है । इसकी लकडी कुछ पीलापन लिए बहुत मजबूत होती है और इमारत के काम के अतिरिक्त गाडी, पालकी, नाव आदि बनाने के काम में भी आती है । इसे 'सुल्ताना चंपा' भी कहते हैं ।

चंपा ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चम्पा] एक पुरी जो प्राचीन काल में अंग देश की राजधानी थी । यह वर्तमान भागलपुर के आस पास कहीं रही होगी । कर्ण यहीं का राजा था ।