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चरखपूजा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चरखपूजा संज्ञा स्त्री॰ [फ़ा॰ चर्ख + सं॰ पूजा ] एक प्रकार की पूजा जो चैत की संक्रांति को होती है । विशेष—इसका आयोजन ७ या ८ दिन पहले होता है । यह पूजा शिव को प्रसन्न करने के लिये की जाती है । इसमें भक्त लोग गाते बजाते और नाचते हुए भक्ति में उन्मत्त से हो जाते हैं, यहाँ तक कि कोई कोई अपनी जीभ छेदते हैं, कोई लेहि के काँटे पर कूदते हैं और कोई अपनी पीठ को बरछी से नाथकर चारों ओर घूमते हैं । जिस खंभे पर इस बरछे को लगाकर चारो ओर घूमते हैं, उसे चरख कहते हैं । ये सब क्रियाएँ एक प्रकार के संन्यासी करते हैं । अंग्रेजी शासन- काल में ये क्रियाएँ बहुत संक्षिप्त हो गई । बृहद्धर्म पुराण नामक ग्रंथ में इस पूजा का विधान और फल लिखा हुआ है । ऐसी कथा है कि चैत्र की संक्रांति को वाण नामक एक शैव राजा ने भक्ति के आवेश में अपने शरीर का रक्त चढ़ाकर शिव को प्रसन्न किया था ।