चर्चरी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चर्चरी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. एक प्रकार का गाना जो बसंत में गाया जाता है । फाग । चाँचर ।
२. होली की धूमधाम । होली का उत्सव । होली का हुल्लड़ ।
३. एक वर्णावृत्त जिसमें रगण भगण, दो जगण, भगण और तब फिर रगण (र, स, ज, ज, भ, र) होता है ।जैसे,—बैन ये सुनिकै चली मिथिलेशजा हरषाय कै । हाँकिकै पहुँचै रथै सुरआपगा ढिग जायकै ।
४. करतलध्वनि । ताली बजाने का शब्द ।
५. ताल के मुख्य ६० भेदों में से एक ।
६. चर्चरिका ।
७. प्राचीन काल का एक प्रकार का ढोल या बाजा जो चमड़े से मढ़ा हुआ होता था ।
८. आमोद प्रमोद । क्रीड़ा ।
९. गाना बजाना । नाचता कूदना । आनंद की धूम ।