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चवाई

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चवाई वि॰ [हिं॰ चवाव] [वि॰ स्त्री॰ चवाइन]

१. बदनामी की चर्चा फैलानेवाला । कलंकसूचक प्रवाद फैलानेवाला । दूसरों की बुराई करनेवाला । निंदक । उ॰—(क) मैं तरुनी तुम तरुन तन चुगल चवाई गाँव । मुरली लै न बजाइयो कबहुँ हमारे गाँवा—पद्मारकर (शब्द॰) । (ख) चौचँद चार चवाइन के चहुँ ओर मचैं बिरचैं करि हाँसी (शब्द॰) । (ग) चार चवा- इनै लै दुरबीनन धाओ न आज तमाशे लखात हैं ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।

२. झूठी बात करनेवाला । व्यर्थ इधर की उधर लगनेवाला । चुगलखोर । उ॰—सुनहु कान्ह बलभद्र चवाई जनमत ही को धूत । सूरश्याम मोहिं गोधन की सौं हौं माता तू पूत । (सूर शब्द॰) ।