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चवाव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चवाव संज्ञा पुं॰ [हिं॰ चौवाई]

१. चारों ओर फैलनेवाली चर्चा । प्रवाद । अफवाह ।

२. चारों ओर फैली हुई बदनामी । निंदा की चर्चा । किसी की बुराई की चर्चा । उ॰ (क) नैनन तें यह भई बड़ाई । घर घर यहै चवाव चलावत हमसों भेंट न माई ।—सूर (शब्द॰) । (ख) ये घरहाई लोगाई सबै, निसि द्योस निवाज हमैं दहती हैं । बातें चवाव भरी सुनि कै रिस लागति पै चुप ह्वै रहती हैं ।—निवाज (शब्द॰) । (ग) ज्यों ज्यों चवाव चलै चहुँ ओर धरै चित चाव ये त्योहि त्यों चोखे—(शव्द॰) । क्रि॰ प्र॰—करना ।—चलना ।—चलाना ।

३. पीठ पीछे की निंदा । चुगलखोरी ।