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चहर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चहर पु † संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ चहल]

१. आनंद की धूम । आनंदो— त्सव । रौनक । उ॰—हरख भए नँद करत बधाई दान देत कहा कहो महर की । पच शब्द ध्वनि बाजत नाचत गावत मंगलचार चहर की ।—सूर (शब्द॰) ।

२. जोर का शब्द । शोर गुल । हल्ला । उ॰—मथति दधि जसुमति मथानी धुनि रही घर गहरि । श्रवन सुनति न महरि बातें जहाँ तहँ गई चहरि ।—सूर (शब्द॰) ।

३. उपद्रव । उत्पात । उ॰— सुत को बरजि राखौ महरि । जमुन तट हरि देख ठाढ़े डरनि आवें बहुरि । सूर श्यामहि नेक बरजौ करत है अति चहरि ।—सूर (शब्द॰) ।

चहर ^२ वि॰

१. बढ़िया । उत्तम ।

२. चुलबुला । तेज । उ॰—गूढ़ गिरिगिरि गुलगुल से गुलाब रंग चहर चगर चटकीले हैं बालक के ।—सूदन (शब्द॰) ।

चहर ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ चौहट] चौक । बाजार । चत्वर । उ॰— इह देही का गरब न करना माँटी में मिल जासी । यो संसार चहर की बाजी साँझ पड़चा उठि जासी ।—सुंदर ग्रं॰, भा॰

१. पृ॰ ६९ ।