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चाँड़िला

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चाँड़िला पु † वि॰ [सं॰ चणड़] [वि॰ स्त्री॰ चाँड़िली]

१. प्रचंड । प्रबल । उग्र । उद्धत । नटखट । शोख । उ॰—नंद सुत लाड़िले प्रेम के चाँड़िले सौहु दै कहत है नारि आगे ।— सूर (शब्द॰)

२. बहुत अधिक । बहुत ज्यादा । उ॰— मोती नग हीरन गहीरन बनत हार चीरन चुनत चितै चोप चित चाँड़िली ।—देव (शब्द॰) ।