चाँप
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चाँप ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ चाप] दे॰ 'चाप' ।
चाँप ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ चपना]
१. चँप या दब जाने का भाव । दबाब ।
२. रेल पेल । धक्का : उ॰—कोई काहू न सम्हारै होत आप तस चाँप । धरति आपु कहै काँपै सग्ग आपु कहँ काँप । —जायसी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—पड़ना ।
२. बंदूक का वह पुरजा जिसके द्वारा कुंदे से नली जुड़ी रहती है ।
३. पैर की आहट । पैर जमीन पर पड़ने का शब्द । वि॰ दे॰ 'चाप' ।
चाँप ^४ पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ चंपा] चंपा का फूल । उ॰—कोई परा भँवर होय बास कीन जनु चाँप । कोइ पतंग भा दीपक कोइ अधजर तन काँप ।—जायसी (शब्द॰) ।