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चाँवर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चाँवर ^१ पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चमार] दे॰ 'चँवर' । उ॰—चित चाँवर हेत हरि ढारै दीपक ज्ञान हरि जोति बिचारै ।—दादू॰, पृ॰ ६९८ ।

चाँवर ^२ † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ चावल] [स्त्री॰ चाँवरी] दे॰ 'चावल' । उ॰—(क) सो एक दिन वह बाई अपने घर में बैठी चाँवर बीनत हती ।—दो सौ बावन॰, भा॰ १, पृ॰ ३१७ । (ख) तिल चाँवरी बतासे मेवा दियौ कुँवरि की गोद ।—सूर॰ १० । ७०४ ।