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चात्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चात्र संज्ञा पुं॰ [सं॰] अग्निमंथन यंत्र का एक अवयव । विशेष—यह बारह अंगुल की खैर की लकड़ी होती है जिसके अगले छोर में लोहे की एक कील लगी होती है और पीछे की ओर छेद होता है ।