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चामर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चामर संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. चौर । चँवर । चौंरी ।

२. मोरछल ।

३. एक वर्णवत्त जिसके प्रत्येक चरण में रगण जगण, रगण, जगण और रगण होते हैं । जैसे,—रोज रोज राधिका सखीन संग आइ कै । खेल रास कान्ह संगचित हर्ष लाइ कै । बाँसुरी समान बोल सप्त ग्वाला गाइ कै । कृष्ण ही रिझावही सु चामरै डुलाई कै ।