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चारना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चारना पु क्रि॰ सं॰ [सं॰चारण] चराना । उ॰—(क) गो चारत मुरली ध्वनि कीन्हा । गोपी जन के मन हर लीन्हा ।— गोपाल (शब्द॰) । (ख) जहँ गो चारत नित गोपाला । संग लिये ग्वालन की माला ।