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चारित्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चारित्र संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. कुलक्रमागत आचार ।

२. चालचलन । व्यवहार । स्वभाव ।

३. संन्यास (जैन) । यौ॰—चारित्र धर्म=संन्यास धर्म ।

४. मरुतगणों में से एक ।