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चार्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चार्य संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. ब्रात्य वैश्य द्वारा सवर्ण स्त्री से उत्पन्न एक वर्णसंकर जाति (मनु) ।

२. दूतकार्य । दौत्य (को॰) ।

३. जासूसी । भेद लेने का कार्य (को॰) ।