चिँगुरना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चिँगुरना † क्रि॰ अ॰ [अनुकरणमूलक देश॰, अथवा हिं॰ चंग]
१. बहुत देर तक एक स्थिति में रहने के कारण किसी अंग का जल्दी न फैलना । नसों का इस प्रकार संकुचित होना कि हाथ पैर जल्दी फैलाते न बने ।
२. सिंकुड़ना । पूरे फैलाव में बल पड़ने से कमी आना । जैसे,—कपड़े, कागज आदि का चिंगुरना । संयो॰ क्रि॰—उठना ।—जाना ।