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चित्तौर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चित्तौर संज्ञा पुं॰ [सं॰ चित्रकूट प्रा॰ चितउड़, चितऊड़ हिं॰ चितउर] एक इतिहासप्रसिद्ध प्राचीन नगर जो उदयपुर के महाराणाओं की प्राचीन राजधानी थी । विशेष—अलाउद्दीन के समय में प्रसिद्ध महारानी पद्मावती या पद्मिनी यहीं कई सहस्र क्षत्रणियों के साथ चिता में भस्म हुई थीं । ऐसा प्रसिद्ध है कि राणाओं के पूर्वपुरुष बाप्पा रावल ने ही ईसवी सन् ७२८ में चितौर का गढ़ बनवाया और नगर बसाया था । सन् १५६८ तक तो मेवाड़ के राणाओं की राजधानी चित्तौर ही रही; उसके पीछे जब अकबर ने चित्तौर का किला ले लिया, तब महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर नामक नगर बसाया । चित्तौर का गढ़ एक ऊँची पहाड़ी पर है जिसके चारों ओर प्राचिन नगर के खंडहर दिखाई पड़ते हैं । हिंदुकाल के बहुत से भवन अभी यहाँ टूटे फूटे खड़े हैं । किले के अंदर भी बहुत से देवमंदिर, कीर्तिस्तंभ, खवासिनस्तंभ सिंगारचौरी आदि प्रसिद्ध हैं । राणा कुंभ ने संवत् १५०५ में गुजरात और मालवा के सुलतान को परास्त करके यह कीर्तिस्तंभ स्मारक स्वरूप बनवाया था । यह १२२ फुट ऊँचा और नौ खंडों का है ।