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चित्रयोग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चित्रयोग संज्ञा पु॰ [सं॰] चौंसठ कलाओं में से एक अर्थात् बूढ़े को जवान और जवान को बूढ़ा बना देने की विद्या । वि॰ दे॰ 'कला' ।