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चिरवल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चिरवल संज्ञा पुं॰ [सं॰ चिरबिल्व या चिरबल्ली] एक पौधा जो बंगाल और उडी़सा से लेकर मदरास और सिंहल तक होता है । विशेष—यह पौधा छह महीने तक रहता है । इसकी जड़ की छाल से एक प्रकार का सुंदर रंग निकलता है जिससे मछली- पट्ठन, नेलोर आदि स्थानों में कपडे़ रँगे जाते हैं । इन स्थानों में इस पौधे की खेती होती है । असाढ़ में इसके बाज बोए जाते हैं । इस पौधे को सुरबुली भी कहती हैं ।