चीत
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चीत पु † ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ चित]
१. चित्त । मन । दिल । उ॰— ढोला आमण दूमणउ नखती खूदइ भीति । हमथी कुण छइ आगली बसी तुहारइ चीति ।—ढोला॰, दू॰ १३७ ।
२. इच्छा । विचार । उ॰—कै खाना कै सोवना, और न कोई ।
चीत । सतगुरु सब्द बिसारिया, आदि अंत का मीत ।—कबीर सा॰ सं॰, पृ॰ ६२ ।
चीत ^२पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ चित्रा] चित्रा नक्षत्र । उ॰—तोही देखे पिउ पलुहै काया । उतरा चीत बहुरि करु माया ।—जायसी (शब्द॰) ।
चीत ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰] सीसा नामक धातु ।