चुनौती

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

चुनौती ^१ संज्ञा स्त्री॰ [?]

१. प्रवृत्ति बढ़ानेवाली बात । उत्तेजना । बढ़ावा । चिट्टा । उ॰—मदन नृपति को देश महामद बुद्धि बल बसि न सकत उर चैन । सूरदास प्रभुदूत दिनहि दिन पठवत चरित चुनौती दैन ।—सूर (शब्द॰) ।

२. युद्ध के लिये उत्तेजना या आहवान । ललकार । उ॰— (क) लछिमन अति लाघव सों नाक कान बिनु कीन्हि । ताके कर रावन कहँ मनहु चुनौती दीन्हि ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) छठे मास नहिं करि सकै बरस दिना करि लेय । कहै कबीर सो संत जन यमै चुनौती देय ।—कबीर (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰— देना ।

३. वह आह्वान जो किसी को वादविवाद करके अथवा और किसी प्रकार किसी विषय का निर्णय या अपना पक्ष प्रमाणित करने के लिये दिया जाता है । प्रचार ।

चुनौती ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ चुनौटी] दे॰ 'चुनौटी' ।