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चूरनहार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चूरनहार संज्ञा पुं॰ [सं॰ चूर्णहार ] एक प्रकार की जंगली बेल जिसके पत्ते बहुत लंबे, चिकने और कुछ मोटे होते हैं । विशेष— इसमें मीठी गंधवाले छोटे छोटे फूल भी लगते हैं । इसकी जड़, पत्तियों और छाल आदि का व्यवहार औषधों में होता है । वैद्यक में इसे कसैला, गरम त्रिदोषनाशक, रुधिरविकार को दूर करनेवाला और कृमिनाशक माना है । कहते हैं, विषम ज्वर की यह बहुत अच्छी दवा है ।