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चौँक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चौँक संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ चमत्कृत, प्रा॰ चमँक्कि, चवक्कि, चवँकि] वह चंचलता जो भय, आश्चर्य या पीडा के सहसा उपस्थित होने पर हो जाती है । एकाएक डर जाने या आश्चर्य में पड जाने के कारण शरीर का झटके के साथ हिल उठना और चित्त का उचट जाना । झिझक । भडक । क्रि॰ प्र॰—उठना ।—जाना ।—पडना ।