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चौपैया

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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चौपैया संज्ञा पुं॰ [सं॰ चतुष्पदी]

१. चार चरणों वाले एक छंद का नाम जिसके प्रत्येक चरण में १०,८ और १२ के विश्राम से ३० मात्राएँ होती हैं और अंत में एक गुरु होता है । विशेष—इसके आरंभ में एक द्विकल के उपरांत सब चौकल होने चाहिए और प्रत्येक चौकल में सम के उपरांत सम और विषम के उपरांत विषम कल का प्रयोग होना चाहिए; साथ ही चारो चरणों का अनुप्रास भी मिलना चाहिए । जैसे,—भै प्रकट कृपाला, दीन दयाल, कौशल्या हितकारी । हर्षित महतारी, मुनि मन हारी अद्भुत रूप निहारी । लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा, निज आयुध भुजचारी । भूषन बनमाला, नयन विशाला, शोभा सिंधु खरारी । †

२. चारपाई । खाट ।