छपन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

छपन ^१ † वि॰ [हिं॰ छिपना]

१. गुप्त । गायब । लुप्त । (पश्चिम में प्रयुक्त) । उ॰— न जाने कहाँ छपन हो गई । —श्रद्धाराम (शब्द॰) ।

छपन ^२पु † वि॰ [सं॰ षट्पच्चाशत्, प्रा॰ छपन्न] दे॰ 'छप्पन' । उ॰—क्रोध काल प्रत्यक्ष ही कियौ सकल कौ नास । सुंदर कौरव पांड़ुवा छपन कोटि परभास ।—सुंदर ग्रं॰, भा॰ पृ॰ ७०६ । यौ॰—छपनकोट, छपनकोटि = छप्पन करोड़ । उ॰—सागर कोट जाके कलसार । छपन कोट जाके पनिहार ।—दरिया॰ बानी, पृ॰ ४३ ।

छपन ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ क्षपण] विनाश । नाश । संहार । उ॰— छोनी में न छाँड़यौ छप्यौ, छोनिप को छौना छोटी छोनिप छपन बाँको बिरुद्ध हों ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १६० ।