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छरछर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छरछर संज्ञा पुं॰ [अनु॰ छर]

१. कणों या छर्रों के वेग से निकलने और दूसरी वस्तुओं पर गिरने का शब्द । उ॰— तिहि फिर मंड़ल बीच परी गोली झर झर झर । तहँ फुट्टिय कर गौर श्रोन छुट्टिय छत छर छर ।—सूदन (शब्द॰) ।

२. पतली लचीली छड़ी के लगने का शब्द । सट सट । उ॰— काहे कौं हरि इतनौ त्रास्यौ । सुनि री मैया मेरैं भैया कितनौ गोरस नास्यौ । जब रजु सौं कर गाढे़ बाँधे छर छर मारि साँटि । सूने घर बाबा नँद नाहिं, ऐसैं करि हरि ड़ाँटि ।— सूर॰, १० । ३७५ ।