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छाकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छाकना ^१पु † क्रि॰ अ॰ [हिं॰ छकना]

१. खा पीकर तृप्त होना । अघान । अफरना । उ॰—खटरस भोजन नाना बिधि के करत महल के माहीं । छाके खात ग्वाल मंडल में वैसो तो सुख नाहीं ।—सूर (शब्द॰) ।

२. शराब आदि पीकर मस्त होना । उ॰—सुख के निधान पाए हिय के पिधान लिए ठग के से लाडू खाए प्रेम मधु छाके हैं ।—तुलसी (शब्द॰) ।

छाकना ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ छकना(= हैरान होना)] चकित होना । भौचक्का रह जाना । हैरान होना । उ॰—विविध कता के जिन्हैं ताके सुर बृंद छाके, वासव धनुष उपमा के तुंगता के हैं । रघुराज (शब्द॰) ।