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छाजन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छाजन ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ छादन] आच्छादन । वस्त्र । कपड़ा । उ॰— छाजन भोजन प्रीति सों दीजै साधु बुलाय । जीवन जस हो जगत में अंत परमपद पाय ।—कबीर (शब्द॰) । यौ॰—भोजन छाजन = खाना कपड़ा ।

छाजन ^२ संज्ञा स्त्री॰

१. छप्पर । छान । खपरैल । उ॰—तपै लाग जब जेठ अषाढ़ी । भइ मोकहँ यह छाजन गाढ़ी ।—जायसी (शब्द॰) ।

२. छाने का काम या ढंग । छवाई ।

३. कोढ की तरह का एक रोग जिसमें उँगलियों के जोड़ के पास तलवा चिड़चिड़ाकर फटता है और उसमें घाव हो जाता है । यह रोग हाथियों को भी होता हैं । अपरस ।