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छायापुरुष

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छायापुरुष संज्ञा पुं॰ [सं॰] हठयोग के अनुसार मनुष्य की छायारूप आकृति जो आकाश की ओर स्थिर दृष्टि से बहुत देर तक देखते रहने की साधना करने से दिखाई पड़ती है । विशेष—तत्र में लिखा है कि इस छायारूप आकृति के दर्शन से छह महीने के भीतर होनेवाली भविष्य बातों का पता लग जाता है । यदि पुरुष की आकृति पूरी पूरी दिखाई पड़े तो समझना चाहिए कि छह महीने के भीतर मृत्यु नहीं हो सकती । यदि आकृति मस्तकशून्य दिखाई पड़े़ तो समझना चाहिए कि छह महीने के भीतर अवश्य मृत्यु होगी । यदि चरण न दिखाई पड़े तो भार्या की मृत्यु और यदि हाथ न दिखाई पड़े तो भाई की मृत्यु निकट समझनी चाहिए । यदि छायापुरुष की आकृति रक्तवर्ण दिखाई पड़े तो समझना चाहिए कि धन की प्राप्ति होगी । इसी प्रकार की और बहुत सी कल्पनाएँ हैं ।