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छिपारुस्तम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छिपारुस्तम संज्ञा पुं॰ [हिं॰ छिपना + फा़॰ रुस्तम]

१. वह व्यक्ति जो अपने गुण में पूर्ण हो, परंतु प्रख्यात न हो । उ॰—अरी, तू तो छिपी रुस्तम है । आज तक हमको अपना गाना नहीं सुनाया था ।—सैर॰, पृ॰ २९ ।

२. ऐसा दुष्ट जिसकी दुष्टता लोगों पर प्रकट न हो । गुप्त गुंड़ा । उ॰—क्यों मियाँ, यह कहिए छिपे रुस्तम निकले मियाँ खलील ।— फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ १९९ ।

छिपारुस्तम