छीजना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]छीजना क्रि॰ अ॰ [सं॰ क्षयण या क्षीण] क्षीण होना । घटना । कम होना । ह्रास होना । अवनत होना । उ॰—(क) छीजहिं निशिचर दिन औ राती । निज मुख कहे सुकृत जोहि भाँती ।—तुलसी (शब्द॰) (ख) लहर झकोर उड़हिं जल भीजा । तौंहू रूप रंग नहिं छीजा ।—जायसी (शब्द॰) । (ग) सखि ! जा दिन तें परदेस गए पिय ता दिन ते तन छीजत हैं ।—सुंदरीसर्वस्व (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—जाना ।