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छीर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छीर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ क्षीर, प्रा॰ छीर] । उ॰—(क) माता अछत छीर बिन सुत मरै, अजा कंठ कुच सेई ।—सूर॰, १ ।२०० । (ख) छीर बही भूतल नदी त्रिबिध चले पवमान ।—प॰ रासो, पृ॰ १३ ।

छीर ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ शिरा, प्रा॰ छिरा, हिं॰ छोर]

१. कपड़ें आदि का वह किनारा जहाँ लंबाई समाप्त हो । छोर । मुहा॰—छोर डालना=धोती आदि में किनारे का तागा निकालकर झालर बनाना ।

२. वह चिह्न जो कपड़ें पर डाला जाय ।

३. कपडे़ के फटने का चिह्न । क्रि॰ प्र॰—पड़ना ।