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छुकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छुकना पु † क्रि॰ अ॰ [हिं॰ झुकना] नीचे की ओर ढलना । निहुरना । नवना । उ॰— डगमगात गिरि परत पइन पर भुज भ्राजत नंदलाल । जनु श्रीधर श्रीधरत अधोमुख धुकत धरनि मानी नमि नाल ।—सूर (शब्द॰) ।

२. गिर पड़ना । उ॰— (क) लेत उसास नयन जल भरि भरि धुकि जु परी धरि धरणी ।— सूर (शब्द॰) । (ख) रुंड पर रुंड धुकि परे धरि धरणि पर गिरत ज्यौं सग करि बज्र वारे ।—सूर (शब्द॰) ।

३. वेग से टूटना । झपटना । टूट पड़ना । उ॰— (क) तुलसिदास रघुनाथ नाम धुनि अकनि गीध धुकि धायो ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) मानो प्रतच्छ परब्बत की नभ लीक लसी कपि ज्यौं धुकि धायो ।— तुलसी (शब्द॰) ।

४. आतंकित होना । त्रस्त होना । घबड़ाना । उ॰— राजन राव सबै उपराव खुमान की धाक धुके यों कहैं हैं ।—भूषण ग्रं॰, पृ॰ १२७ ।