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छूँछा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छूँछा †पु वि॰ [हिं॰ छूँछा] दे॰ 'छूँछा' । उ॰—आप छूँछ औरन ब्रत ठारै, बेद शास्त्र जिन नाहिं उचारे ।—कबीर सा॰, पृ॰ ४६५ ।

छूँछा वि॰ [सं॰ तुच्छ, प्रा॰ चुच्छ, छूँच्छ] [वि॰ स्त्री॰ छूँछी]

१. जिसके भीतर कोई वस्तु न हो । खाली । रीता । रिक्त । जैसे, छूँछा घड़ा, छूँछी नली, छूँछा हाथ । उ॰—(क) पैठे सखिन सहित घर सूने माखन दधि सब खाई । छूँछी छाँड़ि मटुकिया दधि को हँसि सब बाहिर आई ।—सूर (शब्द॰) । (ख) जब विन प्रान पिंड है छूँछा । धर्म लाग कहिए जो पूँछा ।—जायसो (शब्द॰) । मुहा॰—छूँछा हाथ = (१) द्रव्य से खाली हाथ । (२) बिना हथियार का हाथ । हाथ जिसमें छड़ी या डंड़ा आदि न हो । विशेष—इस शब्द का प्रयोग प्रायः छोटी वस्तुओं के लिये होत ा है, मकान आदि की बड़ी वस्तुओं के लिये नहीं; पर कहीं कहीं मकान के लिये भी इसका प्रयोग प्राप्त होता है ।

२. जिसके भीतर कुछ तत्व या सार न हों । निःसार ।

३. जिसके पास रुपया पैसा न हो । निर्धन । जैसे,—छूछे को कौन पूछे ? ।