छूट

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

छूट संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ छूटना]

१. छूटने का भाव । छुटकारा । क्रि॰ प्र॰—देना ।—पाना ।—मिलना ।—होना ।

२. अवकाश । फुरसत । क्रि॰ प्र॰—देना ।—पाना ।—मिलना ।—लेना ।—होना ।

३. देनदारों या असामियों के ऋण या लगान की माफी । उस रुपए या धन को अपनी इच्छा से छोड़ देना जो किसी के यहाँ चाहता हो । छुड़ौती ।

४. किसी कार्य या उसके किसी अग को भूल से न करने का भाव । किसी कार्य से सबंध रखनेवाली किसी बात पर ध्यान न जने का भाव । उ॰—करि स्नान अन्न दै दाना । एको तासै नाम बखाना । यहि के माँहिं छूट जो होई । एकादसि बिसरावा सोई ।—सबल (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—देना ।—मिलना ।—पाना ।

५. वह धन या रुपया जो किसी के यहाँ चाहता या बकाया हो पर किसी कारण से जमीदार या महाजन जिसे छोड़ दे । वह देना जो माफ हो जाय ।

६. स्वतंत्रता । स्वच्छंदता । आजादी ।

७. वह उपहास की बात जो किसी पर लक्ष्य करके निःसंकोच कही जाय । वह उक्ति जो बिना शिष्टता आदि का विचार किए किसी पर कही जाय । गाली गलौज । क्रि॰ प्र॰—चलना ।—होना ।

८. पटैत, फेंकैत बंकैत आदि की वह लड़ाई जिसमें जहाँ जिसे दाँव मिले वह बेधड़क वार करे । क्रि॰ प्र॰—लड़ना ।

९. स्त्री पुरुष का परस्पर संबंधत्याग । तिलाक ।

१०. वह स्थान जहाँ से कबूतरबाज शर्त बदकर कबूतर छोड़ें ।

११. बौछार । छींटा ।

१२. मालखंभ की एक कसरत जिसमें कोई पकड़ करके हाथों के थपेडे़ देकर नीचे कूदते हैं । विशेष—यह दो प्रकार की होती है, एक 'दो हत्थी' दूसरी 'उलटी' । दो हत्थी में दोनों हाथों से बेंत पकड़ते हैं फिर जिस प्रकार उड़ान की थी उसी प्रकार पैरों को पीठ के पास ले जाकर उलटा उतारते हैं ।