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छेकापहनुति

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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छेकापहनुति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक अलंकार जिसमें दूसरे के ठीक अनुमान या अटकल का अयथार्थ उक्ति से खंडन किया जाता है । जैसे—सीसी कर न सिखात है करत अधर छत पीर । कहा मिल्यो नागर पिया ? नहिं सखि सिसिर समिर । यहाँ नायिका के अधर पर क्षत देखकर सखी अपना अनुमान प्रकट करती है कि क्या नायक मिला था ? इसपर नायिका ने यह कहकर कि 'नहीं शिशिर की हवा लगती है' उसके अनुमान का खंडन किया ।