छेहरा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]छेहरा पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ छाया] अलगाव । व्यवधान । विच्छेद । विरह । उ॰—कह्यौ न परत कछु रह्यौ न परत है सहयौ न परत छिन छेहरा ।—घनानंद, पृ॰ ३३८ ।
छेहरा पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ छाया] अलगाव । व्यवधान । विच्छेद । विरह । उ॰—कह्यौ न परत कछु रह्यौ न परत है सहयौ न परत छिन छेहरा ।—घनानंद, पृ॰ ३३८ ।