छैना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]छैना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ क्षि √क्षयण; हिं॰ छय + ना /?/ (प्रत्य॰)]
१. छीजना । क्षीण होना । कम होना ।
२. नष्ट होना । मुहा॰—छै जाना = छेद का फट जाना । किसी छेद का फैलकर इतना बढ जाना कि उसके आसपास का स्थान फट जाय । जैसे, कान छै जाना; अर्थात् कान में किए हुए छेद का इतना फैल जाना कि लौ फट जाना ।