जठर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

जठर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. पेट । कुक्षि । यौ॰—जठरगद । जठरज्वाल = भूख । जठरज्वाला । जठरयंत्रणा, जठरयातना = गर्भवास का कष्ट । जठराग्नि । जठरानल ।

२. भागवत पुराणानुसार एक पर्वत का नाम । विशेष—यह मेरु के पूर्व उन्नीस हजार योजन लंबा हो और नील पर्वत से निषघ गिरि तक चला गया है । यह दो हजार योजच चौड़ा और इतना ही ऊँचा है ।

३. एक देश का नाम । विशेष—बृहत्संहिता के मत से यह देश श्लेषा, मघा और पूर्वा- फाल्गुनी के अधिकार मैं है । महाभारत में इसे कुक्कुर देश के पास लिखा है ।

४. सुश्रुत के अनुसार एक उदर रोग । विशेष—इस उदर रोग में पेट फूल जाता है । इसमें रोगी बलहीन और वर्णहीन हो जाता है तथा उसे भोजन से अरुचि हो जाती है ।

५. शरीर । देह ।

६. मरकत मणि का एक दोष ।

जठर ^२ वि॰

१. बृद्ध । बूढ़ा ।

२. कठिन ।

३. बँधा हुआ (को॰) ।