सामग्री पर जाएँ

जड़हन

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

जड़हन संज्ञा पुं॰ [हिं॰ जड़ + हनन (= गाड़ना)] धान का एक प्रधान भेद जिसके पौधे एक जगह से उखाड़कर दूसरी जगह बैठाए जाते हैं । विशेष—यह धान असाढ़ में घना बोया जाता है । जब पौधे एक या दो फुट ऊँचे हो जाते हैं, तब किसान इन्हें उखाड़कर ताल के किनारे बीचे खेतों में बैठाते हैं । वह खेत, जिसमें इसके बीज पहले बोए जाते हैं, 'बियाड़' कहलाता है, और पौधे के बीज को 'बेहन' तथा बीज बोने को 'बेहन डालना' कहते हैं । बीज को बियाड़ से उखाड़कर दूसरे खेत में बैठाने कौ 'रोपना' या 'बैठाना' कहते हैं; और वह खेत जिसमें इसके पौधे रोपे जाते है, 'सोई', 'डाबर', आदि कहलाता है । जड़हन पौधों में कुआर के अंत में वाल फूटने लगती है, और अगहन में खेत पककर कटने योग्य हो जाता है । इस प्रकार के धान की अनेक जातियाँ होती हैं जिनमें से कुछ के चावल मोटे और कुछ के महीन होते है । यह कभी कभी तालों के किनारे या बीच में भी थोड़ा पानी रहने पर बोया जाता है; और ऐसी बोआई को 'बोआरी' कहते हैं । अगहनी के अतिरिक्त धान का एक और भेद होता है जिसे कुआरी कहते हैं । इस भेद के धान 'ओसहन' कहलाते हैं ।