जत्र
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]जत्र पु क्रि॰ वि॰ [सं॰ यत्र] जहाँ । जिस जगह । उ॰—किते जीव संमूह देखंत भज्जैं । मृगं व्याघ्र चीते रिछं जत्र गज्जैं ।— ह॰ रासो, पृ॰ ३६ ।
जत्र पु क्रि॰ वि॰ [सं॰ यत्र] जहाँ । जिस जगह । उ॰—किते जीव संमूह देखंत भज्जैं । मृगं व्याघ्र चीते रिछं जत्र गज्जैं ।— ह॰ रासो, पृ॰ ३६ ।