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जत्रु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जत्रु संज्ञा पु॰ [सं॰]

१. गले के सामने की दोनों ओर की वह हड्डी जो कंधे तक कमानी की तरह लगी रहती है । हँसली । हँसिया । उ॰—यज्ञोपवीत पुनीत बिराजत गूढ़ जत्रु बनि पीन अंस तति ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ४१५ ।

२. कंधे और बाँह का जोड़ ।